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पीएम-कुसुम  ·  मध्य प्रदेश

पीएम-कुसुम योजना मध्य प्रदेश: किसान की ज़मीन पर 2 मेगावाट सोलर प्लांट कैसे लगता है।

हमने मंदसौर के बालागुड़ा और निंबोद तथा नीमच के झांझरवाड़ा में कुसुम-A प्लांट बनाए हैं और 15 से ज़्यादा प्लांट डिज़ाइन किए हैं। यहां पूरी प्रक्रिया आसान भाषा में है।

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योजना

कुसुम-A क्या है

पीएम-कुसुम केंद्र सरकार की किसानों के लिए सोलर योजना है। कुसुम-A में किसान या उनका समूह अपनी ज़मीन पर 0.5 से 2 मेगावाट का सोलर प्लांट लगाता है और पूरी बिजली 25 साल के अनुबंध (PPA) पर बिजली कंपनी को बेचता है। इससे कम उपज वाली ज़मीन से भी हर महीने पक्की आमदनी होती है।

मध्य प्रदेश में योजना MPUVNL देखता है और बिजली तीन कंपनियां खरीदती हैं: MPPKVVCL (पश्चिम — नीमच, मंदसौर, रतलाम), MPMKVVCL (मध्य) और MPPoKVVCL (पूर्व)।

असली आंकड़े

बालागुड़ा के 2 मेगावाट प्लांट ने कितना कमाया

विवरणपहले 106 दिन (मार्च–जून 2026)
ग्रिड में भेजी बिजली11,36,160 यूनिट
औसत रोज़ाना उत्पादन10,718 यूनिट
कुल बिल राशि₹36,92,521
CUF (औसत)22.32%
2.0 MW PM-KUSUM solar plant at Balaguda, Mandsaur built by WattPick Solar
Balaguda2.0 MW AC
PM-KUSUM ground-mounted solar plant at Nimbod, Mandsaur
Nimbod1.1–1.2 MW
Piling and column erection at Jhanjharwada PM-KUSUM solar site
JhanjharwadaCivil & MMS
प्रक्रिया

ज़मीन से पहले बिल तक — कदम दर कदम

01

ज़मीन और सबस्टेशन जांच

ज़मीन का आकार, छाया, सबस्टेशन से दूरी और उसकी खाली क्षमता की जांच।

02

राउंड, LoA और PPA

बिजली कंपनी के राउंड में आवेदन, आवंटन के बाद 25 साल का अनुबंध।

03

इंजीनियरिंग डिज़ाइन

PVSyst, लेआउट, SLD, अर्थिंग और 11 kV लाइन — बैंक और CEIG के लिए पूरा ड्रॉइंग सेट।

04

लोन

ज़्यादातर किसान PPA के आधार पर बैंक लोन लेते हैं; ज़रूरी तकनीकी कागज़ हम तैयार करते हैं।

05

निर्माण (EPC)

सिविल, स्ट्रक्चर, पैनल, इन्वर्टर, पैनल, ट्रांसफार्मर और 11 kV लाइन — हमारी अपनी टीम।

06

CEIG, सिंक्रोनाइज़ेशन और बिलिंग

जांच, मीटरिंग, ग्रिड से जोड़ना और फिर हर महीने बिल।

सवाल-जवाब

कुसुम योजना: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कुसुम-A में प्लांट कौन लगा सकता है?

किसान, किसानों का समूह, सहकारी समिति, पंचायत या FPO — अपनी ज़मीन पर खुद लगा सकते हैं या ज़मीन डेवलपर को किराये पर दे सकते हैं। ज़मीन 33/11 kV सबस्टेशन के पास होनी चाहिए।

2 मेगावाट के लिए कितनी ज़मीन चाहिए?

आमतौर पर लगभग 4–5 एकड़ प्रति मेगावाट, ज़मीन के आकार और ढलान के अनुसार। सर्वे और PVSyst डिज़ाइन से सही आंकड़ा तय होता है।

बिजली कौन खरीदता है?

बिजली कंपनी (पश्चिम मध्य प्रदेश में MPPKVVCL) 25 साल के अनुबंध पर। हमारे बालागुड़ा प्लांट का रेट ₹3.25 प्रति यूनिट है; आपका रेट टेंडर राउंड से तय होगा।

क्या अभी आवेदन खुला है?

नई क्षमता राउंड में खुलती है। आपके सबस्टेशन के लिए राउंड खुला है या नहीं, कॉल करके पूछें — हम जांच कर बताएंगे।

सबस्टेशन के पास ज़मीन है? खसरे की लोकेशन भेजिए, हम मुफ़्त जांच करेंगे।

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